ज्योति हत्याकांड में आरोपियों को दोषी करार होने के बाद शंकर नागदेव बोले न्याय के प्रति नतमस्तक हूँ।

कानपुर के हाई प्रोफाइल ज्योति हत्याकांड के मामले में 8 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद ज्योति के हत्यारे पति, प्रेमिका समेत 6 लोग को दोषी करार तथा सास समेत 3 को बरी कर दिया है सजा के बिंदु पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। ज्योति के पिता जबलपुर निवासी शंकर नागदेव आज कानपुर जर्नलिस्ट क्लब में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मुझे कानून पर पूरा भरोसा था और आज कोर्ट के निर्णय पर खुशी जताते हुए कहा कि न्याय की जीत हुई है। लंबे संघर्ष के बाद उनकी बेटी को न्याय मिला है। शासकीय अधिवक्ता दामोदर मिश्रा ने कहा कि वह कल कोर्ट के सामने इस जघन्य अपराध के लिए आरोपियों को फांसी देने की मांग करेंगे वही शंकर नागदेव ने अपने सिंधी समाज के लोगों के खिलाफ आक्रोश जताया और कहा कि उनके समाज के रसूकदार लोग आरोपियों की पैरवी करते रहे उनकी कोई मदद नही की वही उन्होंने तत्कालीन आईजी आशुतोष पाण्डेय का आभार जताया कि उन्होंने इस केस में न्याय दिलाने के लिये बहुत मेहनत की। 
बरी लोगों की हाईकोर्ट में होगी अपील

ADGC क्रिमिनल कानपुर धर्मेंद्र पाल सिंह ने बताया कि इस केस में सबूतों को कड़ी दर कड़ी जोड़ा गया। पीयूष ने हत्याकांड को अंजाम देने में कई बड़ी गलतियां की थी। वो शुरू से झूठ बोलता गया और पुलिस की कड़ी पूछताछ के बाद वो पूरी तरह टूट गया। उसकी कराई FIR भी फेक साबित हुई। उन्होंने बताया कि पीयूष की मां और दोनों भाइयों को बरी किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चैलेंज करेंगे। केस में पिता को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन फैसला आने से कुछ साल पहले ही उनकी डेथ हो गई। कोर्ट ने हत्याकांड में तीनों की कोई भूमिका नहीं पाई। बता दें, यूपी सरकार की तरफ से शासकीय अधिवक्ता दामोदर दास मिश्रा को ये केस सौंपा गया था।

2014 में हुआ था ज्योति हत्याकांड।

कानपुर के आठ साल पुराने चर्चित ज्योति हत्याकांड में गुरुवार को अपर जिला जज प्रथम अजय कुमार त्रिपाठी की अदालत ने फैसला सुना दिया है। मामले में ज्योति के पति पीयूष, उसकी प्रेमिका मनीषा मखीजा के अलावा मनीषा के ड्राइवर अवधेश व हत्या में शामिल रहे आशीष, सोनू व रेनू को दोषी करार दिया गया है।

मामले में पुलिस को सही सूचना न देने के आरोपी पीयूष के भाइयों व मां को पर्याप्त साक्ष्य न होने के आधार पर बरी कर दिया गया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी पीयूष के पिता ओमप्रकाश की मौत हो चुकी है। पांडुनगर निवासी बिस्कुट व्यापारी ओमप्रकाश श्यामदासानी की बहू ज्योति श्यामदासानी की 27 जुलाई 2014 को संदिग्ध हालात में हत्या हो गई थी। ज्योति के पति पीयूष ने स्वरूप नगर थाने जाकर ज्योति के अपहरण की कहानी सुनाई थी। लगभग 2 घंटे बाद पनकी में ज्योति का खून से लथपथ शव मिला था।

पीयूष की कहानी पर विश्वास ना होने पर पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो पीयूष द्वारा ही अपनी प्रेमिका मनीषा मखीजा के प्रेम जाल में फंसकर भाड़े के हत्यारों से ज्योति की हत्या करवाने और उसे लूट व अपहरण की वारदात दिखाने की कोशिश करने का मामला सामने आया था। 

पुलिस ने पीयूष, उसकी प्रेमिका मनीषा मखीजा, मनीषा के ड्राइवर अवधेश कुमार चतुर्वेदी, पीयूष से सुपारी लेकर हत्या की साजिश रचने वाले आशीष कश्यप व सुपारी किलर रेनू उर्फ अखिलेश कनौजिया और सोनू कश्यप के अलावा पुलिस को सही जानकारी न देने के आरोप में पीयूष के पिता ओम प्रकाश, मां पूनम व दो भाइयों मुकेश और कमलेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट कोर्ट भेजी थी।

रेनू और सोनू के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया था। रेनू के पास से पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू और ज्योति के गहने बरामद किए थे। अवधेश, रेनू और सोनू घटना के बाद से जेल में ही बंद हैं जबकि बाकी आरोपियों को जमानत मिल गई थी।

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