क्या यूपी चुनाव में 'योगी' पर भारी पड़ेगी विकास दुबे की पटकथा, पढ़िए एसआईटी का राज


उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर विकास दुबे का एनकाउंटर हो चुका है, मगर उसकी पटकथा अभी लिखी जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या 2022 के चुनाव में विकास दुबे की पटकथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भारी पड़ सकती है। दुबे के अंतिम संस्कार के बाद कई तरह के सवालों ने अपनी राह बना ली। जैसे योगी ने एकाएक यूपी में शुक्रवार रात से सोमवार सुबह तक 55 घंटे के लॉकडाउन की घोषणा कर दी, जबकि वहां कोरोना के केस एकदम डबल नहीं हो गए थे। 


 


एक दिन के 1384 नए केसों को मिलाकर शनिवार शाम तक राज्य में कोरोना के 36476 मामले सामने आए हैं। विपक्ष और पुलिस एक्सपर्ट की ओर से एनकाउंटर पर अंगुलियां उठ रही हैं तो उसकी सीबीआई जांच क्यों नहीं कराई। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या योगी सरकार ने खुद को बचाने के लिए एसआईटी गठित की है। तब्लीगी समाज के प्रमुख मौलाना साद का जिक्र हुआ। यूपी में कांग्रेस पार्टी के ब्राह्मण चेहरे जितिन प्रसाद, पूर्व राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई और जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव ने भी 'एनकाउंटर और जाति' पर कुछ इशारा किया है।


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ठाकुर और ब्राह्मण राजनीति पर चर्चा तेज हो गई


विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई थी। कुछ लोगों ने लिखा कि योगी सरकार में ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है। ठाकुर और ब्राह्मण राजनीति पर चर्चा तेज हो गई। जानकारों का सवाल था कि दुबे की हत्या ने उत्तर प्रदेश में ठाकुर समुदाय के खिलाफ ब्राह्मणों के नेतृत्व वाले एक युद्ध को प्रज्वलित किया है। कुछ लोगों ने इस केस को जोड़ते हुए गांधी, गोडसे और तब्लीगी समाज के प्रमुख मौलाना साद का नाम तक ले लिया। कहा, आज गोडसे की जरूरत है। 


 


मीडिया और दूसरे नेताओं ने मौलाना साद को लेकर कठोर टिप्पणियां नहीं कीं, जबकि दुबे एनकाउंटर में बिना सोचे समझे बयान दिए जा रहे हैं। इस मामले के जानकार बताते हैं कि यूपी में दुबे एनकाउंटर कई तरह के राजनीतिक व सामाजिक बदलावों का जरिया बन सकता है। लोगों ने सोशल मीडिया में लिखा कि विकास दुबे की हत्या नहीं हुई है, बल्कि ब्राह्मणों के विश्वास को मार दिया गया है। लोग आपस में मिलकर इस केस की चर्चा न करें, उनमें एक सामाजिक दूरी बनी रहे, इसके लिए कोरोना की आड़ लेकर 55 घंटे का लॉकडाउन कर दिया गया।


 


जब लोगों में यह चर्चा होने लगी कि ये सब दुबे मामले को शांत करने के लिए हो रहा है तो सरकार के कान खुल गए। आनन-फानन में शनिवार को यह घोषणा कर दी गई कि अब हर सप्ताहांत पर सरकारी और निजी कार्यालय बंद रहेंगे। इसके पीछे कोरोना को ही बड़ी वजह बताया गया है। इतने बड़े केस की सीबीआई जांच को लेकर योगी सरकार ने कुछ नहीं कहा। वजह, अगर यह जांच सीबीआई करती तो हो सकता है कि भविष्य में ये मामला योगी के गले की फांस बन जाए। केंद्र में सत्ता बदलने के बाद सीबीआई के पिटारे से कुछ ऐसा निकल जाए, जो राजनीतिक तौर पर योगी को नुकसान पहुंचा दे।


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क्या यूपी सरकार नहीं चाहती थी कि दुबे मामले की परतें खुलें


कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद सीधे तौर पर इस विवाद में नहीं पड़े, मगर उन्होंने कई ट्वीट कर दिए। एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए लिखा कि यूपी पुलिस ने दुबे के परिजनों और दूसरे रिश्तेदारों के साथ गलत व्यवहार किया है। उन्होंने अमर दुबे के साथ नौ दिन पहले ब्याही महिला की परेशानी के बाबत पुलिस को घेरा। यूपी में लगातार हो रही ब्राह्मणों की हत्याओं को लेकर फेसबुक लाइव किया गया। ब्राह्मण चेतना परिषद के जरिए समाज के लोगों की हत्या पर आवाज बुलंद करने की बात कही गई।


 


दुबे केस में प्रभात मिश्रा जैसे लोगों को क्या जानबूझकर मारा गया, इस पर सवाल खड़े किए गए। इस दौरान लोगों ने यूपी में ब्राह्मणों की मौजूदा दयनीय स्थिति को लेकर कई तरह की बातें लिखीं। आगामी चुनाव में योगी को सबक सिखाने की बात कही गई। हालांकि बाद में जितिन प्रसाद ने कहा, ब्राह्मण चेतना समाज, लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए है। इसे दुबे या किसी दूसरे अपराधी के साथ न जोड़ा जाए। ये सब बातें इशारा कर रही हैं कि आगामी चुनाव में कांग्रेस पार्टी अपने खोए हुए वोट बैंक यानी ब्राह्मणों को दोबारा पार्टी में लाना चाह रही है। 


अगर विकास 'ठाकुर' होता तो क्या ऐसा होता : डॉ. उदित राज


कांग्रेस नेता डॉ. उदित राज ने भी इस मामले में योगी सरकार पर तंज कसा। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि अगर विकास दुबे की जगह कोई ठाकुर होता तो क्या ऐसा ही व्यवहार होता। फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर पर ऐसे संदेश चल रहे थे कि यूपी में आगे की राजनीतिक लड़ाई ठाकुर बनाम ब्राह्मण है। कई ब्राह्मणों का आरोप है कि सीएम आदित्यनाथ ब्राह्मण समुदाय की उपेक्षा करते रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। 


 


उन्होंने लिखा कि पहली बार एनकाउंटर में एक ब्राह्मण मारा गया है, इसलिए देशभर में इतना हंगामा मचा है। इस मुठभेड़ के बाद योगी को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी। पहले मुस्लिमों और दलितों का एनकाउंटर होता था। यह पहली बार है जब एक ब्राह्मण का एनकाउंटर हुआ है। यह एनकाउंटर पूरी तरह गलत है। इससे पहले मुसलमान और दलित मारे जाते थे। उस वक्त कोई शोर नहीं होता था। जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव ने सीएम योगी पर जातिवादी होने का आरोप लगा दिया है।


 


मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही योगी ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ गैरकानूनी कार्रवाई शुरू कर दी थी। पूरे उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज को निशाना बनाकर 400 से ज्यादा एनकाउंटर किए गए हैं। यादव ने योगी से पूछा है कि क्या उत्तर प्रदेश में उनकी जाति का कोई अपराधी नहीं है। विकास दुबे भाजपा के कई मंत्रियों की पोल खोलने वाला था, जिससे भाजपा सरकार गिर भी सकती थी। पोल खुलने से पहले ही उसे चुप करा दिया गया। 


 


पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद ने कहा था कि विकास दुबे का जीवित रहना जरूरी था। उससे पूछताछ के दौरान अपराध के कई बड़े खुलासे हो सकते थे। पुलिस और राजनीति के गठजोड़ का पता चलता। अब कम से कम मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए थी। वह भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में।


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