#Kanpur-पत्नी ने जीवन साथी होने का निभाया फर्ज दिव्यांग पति को पीठ पर लादकर कानपुर से ले गयी महाराष्ट्र 


मेरे जीवन का तुम ही हो सार पिया,जान-ए-जिगर सब कुछ तुम पे है निसार पिया।।


तुमसे ज्यादा ना कुछ ना तुमसे बढ़कर,तुम तो हो मेरे जीवन आधार पिया।।


हँसते गाते रोते और मरते जीते,


चाहूँ मैं केवल तेरा ही प्यार पिया।।निकल पड़े हैं संग दोनो जीवन पथ पर,अब एक दूजे बिन जीवन बेकार पिया।।


कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर मंगलवार को ऊपर लिखी पंक्तियों को एक जोड़ी चरितार्थ करते दिखी। स्टेशन पर जीवन साथी (पति-पत्नी) के बीच का अटूट प्रेम और समर्पण देखने को मिला। तपती धूप में माथे से टपकता पसीना और पीठ पर अपने पति को लादे महिला जब कानपुर सेंट्रल पहुंची तो एक पल के लिए हर कोई उसे देखता रह गया।


सेंट्रल स्टेशन पर काफी देर बाद भी जब पति को ले जाने के लिए आसपास कोई साधन न दिखा तो महिला ने अपना पत्नी धर्म निभाया। पति चलने में असमर्थ था तो महिला ही उसका सहारा बनी और उसे पीठ पर उठा कर प्लेटफार्म तक ले गई।


 


केस्को में बिजली ठेकेदार के अधीन काम करने वाले श्रमिक दीपक के लिए इस समय उनकी पत्नी उनको नया जीवन दे रही हैं। डेढ़ महीने पहले फजलगंज में केस्को का काम करने के दौरान एक एक्सीडेंट में श्रमिक दीपक के दोनों पैर टूट गए थे।



अभी कुछ दिनों पहले प्लास्टर खुला है लेकिन वह चल पाने में अक्षम हैं, ऐसे में उनका बैसाखी उनकी पत्नी ज्योति बनी हैं। वह महाराष्ट्र के जलगांव के रहने वाले हैं, जो यहां काम करने आ गए थे। लॉकडाउन के बाद अपने घर जाना चाहते हैं।



सोमवार से सेंट्रल स्टेशन पति के साथ ट्रेन से जाने के लिए वह यहां रह रही हैं। दीपक को उनकी जरूरत के लिए लाना ले जाना ज्योति खुद करती हैं। अपने कंधों पर लादकर उन्हें लाती ले जाती हैं। मंगलवार को वह पुष्पक एक्सप्रेस से अपने पति को लेकर मुंबई रवाना हो गईं।


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