ददुआ के ‘सफाये’ से लेकर ठोकिया को ‘ठोकने’ तक और कानपुर में 150 हॉफ एनकांउटर करने वाले सुपर कॉप अनन्तदेव की रोमांचक कहानी


कानपुर-सद्रक्षणायखल निग्रहणाय... मुंबई पुलिस का यह ध्येय वाक्य पुलिसिंग के ध्येय को बयां कर देता है। सज्जनों की रक्षा और दुर्जनों पर लगाम। यही पुलिस यानी लोक प्रहरी का कर्तव्य है। पुलिस दरअसल न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी भी है। अपराधी को सजा दिलाना उसका काम है लेकिन सजा देना नहीं। हां, खूंखार अपराधियों को काबू करने में सख्ती बरतना मजबूरी हो सकती है, जिसमें पुलिसकर्मी जान का जोखिम उठाते हैं। बेहतर पुलिसिंग अपराधियों के लिए खौफ का पर्याय है तो सज्जनों के लिए मित्र, सेवक और रक्षक। भारत में बेहतर पुलिसिंग का आदर्श प्रस्तुत कर दिखाने वाले ऐसे ही कुछ कर्तव्यनिष्ठ लोक प्रहरियों के बेहतर कार्यों की बानगी है सुपर कॉप एनकाउंटर स्पेशलिस्ट IPS अनन्तदेव तिवारी जो कि अब डीआईजी एसटीएफ लखनऊ का कार्यभार संभालेंगे।



22 माह कानपुर के लोकप्रिय एसएसपी रहे आईपीएस अनंत देव अब DIG एसटीएफ लखनऊ का कार्यभार सम्भालेंगे। शहर में तैनाती के बाद उन्होंने ऑपरेशन क्लीन चलाया। इसमें अपराधियों के दिलों में खौफ बैठाने के लिए हाफ एनकाउंटर का सिलसिला शुरू हुआ। डीआईजी अनंत देव का ट्रांसफर 15 जून की देर रात हुआ। तब तक उनके खाते में 150 से ज्यादा हाफ एनकाउंटर दर्ज हो चुके थे। बतौर एसएसपी अनंत देव ने शहर की कमान कप्तान की गद्दी पर बैठने के साथ ही उन्होंने सर्विलांस सिस्टम को मजबूत करने के लिए सारे प्रयास किए। अपराध और अपराधियों से लड़ने के लिए ऑपरेशन क्लीन की शुरुआत की गई। अपराधियों का हाफ एनकाउंटर करने के साथ ही दबाव बढ़ा। इसमें अपराध में भी कुछ कमी दिखने लगी। इसी कार्यकाल में इनका प्रमोशन हुआ और वह डीआईजी बन गए।


 


सर्विलांस सिस्टम पर रहता था ज्यादा जोर


 


डीआईजी अनंत देव की प्राथमिकता में सर्विलांस सिस्टम हमेशा से रहा है। फोन लिसनिंग और अपराधियों की लोकेशन ट्रेस कर उनका शिकार करने में डीआईजी को महारत हासिल थी। उन्होंने शहर के कई बड़े अपराधिक मामलों को सर्विलांस सिस्टम के जरिए हल किया।


 


चंबल के खूंखार ददुआ का कर चुके सफाया


 


एक समय था जब चंबल के डकैतों के किस्से दुनियाभर में मशहूर हो जाया करते। गब्बर से लेकर फूलन तक और ददुआ से लेकर ठोकिया तक, बीहड़ के डाकुओं ने कानून को धता बता रखा था। डकैतों की बोली आइपीएस अनंत देव तिवारी की गोली ने खामोश कर दी।


अपराधी खुद चले जाते जेल


अनंत देव ने महीनों चंबल में डेरा जमाकर ददुआ और ठोकिया जैसे डकैत और उनके गिरोह के दुर्दांत दस्यु मार गिराए। बीहड़ और यूपी में दस्यु या गैंगेस्टर ही नहीं, मुंबई जाकर आंतकी भी अपनी एके-47 से भी मार गिराए। वहीं कानपुर में पिछले आठ माह में 111 आपराधिक मुठभेड़ का निर्देश कर अपराधियों को पहले अस्पताल और बाद में सलाखों के पीछे पहुंचाया। इसी का नतीजा है कि अनंत देव जिस शहर में जाते हैं, अपराध का ग्राफ गिरने के साथ ही अपराधी या तो शहर छोड़ देते हैं या फिर जमानत कटाकर जेल चले जाते हैं।


 


ऐसे किया ददुआ को ढेर


अनंत बताते हैं, वह एएसपी एसटीएफ थे। पाठा के बीहड़ों में (चंबल) में जुलाई 2007 में 24 घंटे बिना खाए-पीये सरकार के समानांतर अपने नियम कानून चलाने वाले डकैत ददुआ की तलाश कर रहे थे, तभी चित्रकूट मानिकपुर के पास डाकू छोटा पटेल गिरोह से मुठभेड़ हो गई। उन्होंने चार डकैत मार गिराए गए। सुबह करीब नौ बजे जब टीम इसकी लिखा पढ़ी कर रही थी, तभी सूचना मिली की ददुआ सुबह नौ बजे झलमल जंगल में है। टीम ने घेराबंदी की। दोनों तरफ से करीब डेढ़ घंटे तक गोली चली। फायरिंग में ददुआ, अपने छह साथियों समेत मारा गया। जबकि राधे समेत 19 डाकू भाग निकले।


 


खाई थी ठोकिया को ठोकने की कसम


बकौल अनंत देव, ददुआ के सफाये की खुशी मनाने की तैयारी ही चल रही थी कि ठोकिया ने ऑपरेशन में लगी दूसरी टीम के छह जवानों को गोली मार दी। इसके बाद अनंत ने कसम खाई कि जब तक ठोकिया को ठोक नहीं देंगे, ददुआ को मार गिराने का जश्न नहीं मनाया जाएगा। इसके लिए टीम ने करीब 13 महीने तक जंगल की खाक छानी। चार अगस्त 2008 में सिलखोरी के जंगल में 24 जवानों की टीम संग उन्होंने ठोकिया को मार गिराया। इस ऑपरेशन में डकैतों के 15 गैंग का सफाया किया गया। इसमें 32 दस्यु गोली का शिकार हुए, तो 100 से ज्यादा जेल भेजे गए।


 


विधायक के हत्यारों को मार गिराया


बावरियों के बीच रहकर उनकी हर गतिविधि से वाकिफ अनंत देव तिवारी को सहारनपुर, उप्र के सरसावा से विधायक निर्भयपाल शर्मा की हत्या का केस सॉल्व करने की जिम्मेदारी तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ ने सौंपी। उन्होंने हत्या में शामिल काली चरण बावरिया गिरोह के आठ शातिर जौनपुर में मार गिराए। जबकि आठ को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही अपहृत गोरखपुर के कोयला व्यापारी जुगल किशोर जालान को भी मुक्तकराया। उन्हें नेपाल में रखकर पांच करोड़ फिरौती मांगी थी। उन्हें सकुशल बरामद करने के बाद इस कांड में शामिल आरोपितों को कुछ माह बाद एनकाउंटर में मार गिराया। ऐसे ही लखनऊ के व्यापारी संजय झुनझुनवाला, नोएडा के उद्योगपति कपिल गुप्ता, कोलकाता के उद्यमी राजेश दीवान के बेटे प्रतीक दीवान जैसे अपहरण कांड का भी खुलासा किया।


 


आतंकियों पर भी बरसी गोली


अप्रैल 2001 में पाक आतंकी संगठन जैशए-मोहम्मद व लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी बाबर, इमरान समेत तीन को मार किया। इनके पास से राकेट लांचर, एके-47, हैंड ग्रेनेड और आरडीएक्स भी बरामद हुआ। वहीं, मुंबई में पाकिस्तानी एजेंट को मुठभेड़ में मार गिया और दो दर्जन पाकिस्तानी एजेंट व स्लीपिंग माड्यूल्स को जेल भेजा।


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