माँ तुझे सलाम- बच्चों को घर पहुँचने के लिए स्कूटी से अहमदाबाद से कोलकाता की यात्रा के लिए निकली एक माँ 


कानपुर- मां जो जन्मदाता होती है और मां बनने के बाद उसका दिल अपने बच्चे के लिए ही धड़कता है। वो एक बच्चे की मां नहीं, परिवार की, एक समाज की निर्माता होती है। मां एक बच्चे की पहली पाठशाला होती है। बच्चे के चरित्र निर्माण से लेकर उसके भविष्य निर्माण की पूरी जिम्मेदारी एक मां पर होती है। कैसे भी मुश्किल हालात हों मां अपने बच्चों के लिए एक कवच की ढाल की तरह हर वक्त उसके साथ होती है, चाहे वो पास हो या दूर...


ऐसी ही एक मां हैं जिसका नाम है संगीता जो गुजरात के अहमदाबाद प्राइवेट टीचर हैं और पति सूरत में प्राइवेट जॉब कर अपने 3 बच्चों के साथ हँसी-खुशी से जीवन यापन कर रहे थे। तभी अचानक कोरोना ने कोहराम मचाना शुरू कर दिया सरकार ने लॉकडाउन जारी कर दिया संगीता के पति सूरत में ही फ़ँस गए और इधर संगीता तीनों बच्चों के साथ अहमदाबाद में ही लॉक डाउन खत्म होने का इंतजार करने लगी लेकिन लॉक डाउन 01 बाद 02 और उसके बाद लॉक डाउन 03 जारी हो गया संगीता का सब्र जवाब दे गया। लॉकडाउन में सारी जमा पूंजी खत्म होते देख संगीता ने अहमदाबाद से कोलकाता स्थित घर (लगभग 2 हजार) किलोमीटर जाने की ठान लिया और तीनों बच्चों को स्कूटी पर बिठाकर वह कई दिनों में 11 सौ किलोमीटर की यात्रा पूरी करके कानपुर तक पहुंच गई। संगीता से जब इतनी लम्बी यात्रा बच्चों के साथ स्कूटी से करने के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था उसके पति सूरत में फँसे थे लॉकडाउन के कारण वह अहमदाबाद नहीं पहुंच सके सारी जमा पूंजी खत्म हो चुकी थी। इसलिए बच्चों को स्कूटी पर लेकर घर जाने को मजबूर हो गई।


कोरोना काल में लॉकडाउन को लेकर हम आप जब इस बीमारी से बचने के लिए अपने अपने घरों में हैं तो एेसे समय में संगीता जैसी सैकड़ों माताएं अपने बच्चों के लिए संघर्ष कर रही है ऐ माँ तुझे सलाम।


जिन रूट पर ट्रेन नहीं, वहाँ लौटने का नहीं निकला कोई हल दूसरे राज्यों के लिए पास पाने का रास्ता सिर्फ मेडिकल रिपोर्ट


लगभग 56 दिन के लॉकडाउन के कारण अपने घर से दूर कहीं फँसे लोगों को घर पहुँचाने के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है, पर अभी भी बहुत लोग ऐसे हैं, जिनकी इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा। ऐसे लोग ई-पास पाने की कोशिश कर रहे हैं, पर प्रशासन इस मामले में सख़्त रवैया अपनाये हुए है और बहुत सोच-समझकर ही कोई निर्णय ले रहा है। ऐसे में लोगों की परेशानी बरकरार है। लॉकडाउन में लोगो ने बाइक, रिक्शा, ठेला यहाँ तक पैदल घर पहुँचने का प्रण लिया तो सड़कें लबालब हो गयीं। ऐसे में तमाम सरकारों ने उनके लिए पहले बस फिर श्रमिक स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया है लेकिन 130 करोड़ वाले देश मे ये सब नाकाफ़ी नज़र आ रहा है।


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