#कोरोना काल मे दूसरे मरीजों का बुरा हाल, कानपुर-उन्नाव गँगापुल बंद,22 किमी स्कूटी चलाकर कानपुर डायलसिस के लिए आया मरीज़।


▶कोरोना काल मे दूसरे मरीजों का बुरा हाल, संवेदना को झकझोरने वाली ख़बर, डीएम ने रास्ता रोका फँस गया किडनी का मरीज़, कानपुर-उन्नाव गँगा के दोनों पुल बंद कराने से मुसीबत, 22 किमी स्कूटी चलाकर गँगा घाट से कानपुर डायलसिस के लिए आया मरीज़।
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सरकार लॉकडाउन लगाने के साथ दावा करती है की इस दौरान मरीजों और गरीबो की हर जरुरत का ध्यान रखेगा, लेकिन आज कानपुर में एक ऐसा नजारा दिखा जिसे देखकर प्रशासन की बेरहम लापरवाही  पर मानवता भी शर्मसार हो गई, एक कोरोना पेसेंट मिलने से चार दिन पहले उन्नाव डीएम ने कानपुर आने वाले दोनों पुल के गेट बंद करवा दिए थे जिसका नतीजा ये हुआ की शुक्लागंज इलाके से एक पेसेंट को 22 किलोमीटर बाइक चलाकर अपनी डायलसिस कराने कानपुर जिला हॉस्पिटल आना पड़ा वह भी तब जब उसकी दोनों किडनिया अस्सी प्रतिशत ख़राब हो चुकी है । उसने  किसी  साधन के लिए उन्नाव डीएम को कई बार फोन किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई हैरानी ये है की चार दिनों में उसे दूसरी अपनी जिंदगी खतरे में डालनी पड़ी खुद डाक्टर इसे बहुत गलत और अमानवीय बता रहे है।


आप वीडियो को देखकर अंदाजा लगा सकते है कानपुर के जिला हॉस्पिटल में अस्सी प्रतिशत दोनों किडनी खराब की बीमारी से जूझ रहे डायलसिस कराते शिवशंकर को, उसके बाद हाथ में वीगो लटकाये अपनी पत्नी को बैठाये स्कूटी चलाकर हॉस्पिटल से घर जाते शिवशंकर को जाना भी कही अगल बगल नहीं कानपुर से 22 किलोमीटर दूर  उन्नाव जिले के गंगाघाट कस्बे में आपको क्या दुनिया में शायद ही किसी को इस पर यकींन होगा की कोई दोनों किडनी ख़राब पेसेंट डायलेसिस के बाद खुद स्कूटी चलाकर वापस अपने घर  जा सकता है लेकिन जब अधिकारी  बेरहम हो जाए तो ऐसा ही होता है । शिवशंकर चार  दिनों में ऐसा दर्द आज दूसरी बार उठा रहे है जानते है क्यों क्योकि शिवशंकर का आरोप है की उन्हें उन्नाव डीएम की वजह से सब करना पड़ रहा है।
गंगाघाट कस्बे में 27 अप्रैल को  एक कोरोना पेसेंट मिलने की वजह से डीएम उन्नाव ने पेसेंट के मोहल्ले के साथ पांच लाख की आबादी वाले पूरे कस्बे को बंद करवा दिया जबकि उन्हें सील  करना था पॉजिटिव मरीज के मोहल्ले को लेकिन डीएम ने मैनरोड से कानपुर आने वाले दोनों पुल बंद करवा दिए अब दूसरे की स्कूटी मांग कर शिबशंकर डायलसिस कराने आ रहे है।  आलम ये है की रास्ते में कई जगह लेट लेट कर हॉस्पिटल तक पहुंचते है शिवशंकर। शिवशंकर उन्नाव के जिस गंगा घाट कस्बे में रहते है उसकी कानपूर से दुरी सिर्फ एक किलोमीटर लम्बे पुल की इस वजह से गंगा घाट में रहने वाले लगभग पांच लाख लोग कानपुर में ही सर्विस करते है कानपुर के हॉस्पिटलों में ही इलाज कराते है।   ऐसे में कानपूर आने के दोनों पुल बंद होने से शिवशंकर घूमकर आने को मजबूर है जबकि शिवशंकर का घर कोरोना पॉजिटिव आये मरीज से अलग दूसरे इलाके गांधी नगर में रहते है  इसके बावजूद  डीएम ने गंगाघाट कस्बे  से आने वाले सारे साधन भी बंद करवा दिए गए है  सभी मेन रोड बंद करवा दिए है शिवशंकर की पत्नी पायल तो अपने बीमार पति की लाचारी देखकर मन ही मन रो रही है वे रास्ते में हर समय डरती रहती है की पति को कुछ हो न जाए   लेकिन करे क्या जब राहत देने वाले अधिकारी ही बेरहम हो जाए तो कहा जाए।


कानपुर जिला हॉस्पिटल के डायलेसिस इंचार्ज डाक्टर  आशीष ने कहा की जिस तरह स्कूटी चलाकर शिवशंकर डायलेसिस कराने आते है वो उनकी जिंदगी के साथ सबसे बड़ा ख़तरा है  अगर रास्ते में कही भी बीपी बढ़ा तो वही रास्ते में ये बैठ जायँगे  अधिकारी रास्ते में इनसे पूछते है मरहम पट्टी कहा है। कैसे माना जाए कि आप बीमार है। 


कोरोना संक्रमण फैलने से बचाने के लिए अधिकारियों का कोरोना पॉजिटिव आने वाले इलाको को सील करने का अधिकार है। लेकिन उनको दूसरे मोहल्ले में रहने वाले मजबूर लाचार लोगो के साथ गंभीर मरीजों की हालातो का भी ख्याल रखना चाहिए था  उन्हें ऐसे मरीजों को साधन  देना चाहिए या कम से कम जिन पुलों को  सील कराया है उससे ऐसे मजबूरो को पास बनाकर साधन से जाने का इंतजाम तो करना चाहिए ये उनकी जवाबदेही बनता है खुदा न करे अगर शिवशंकर जैसे मरीजों को रास्ते कुछ हो गया तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा??


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