#Kanpur-नही रहे शोभन सरकार, लाखों भक्तों के थे आस्था का केंद्र।

लाखों लोंगो की आस्था के केंद्र रहे संत शोभन सरकार के निधन से भक्तों में शोक की लहर है. कानपुर देहात  के शिवली कोतवाली क्षेत्र के बैरी में बने उनके आश्रम में अंतिम दर्शन के लिए भक्त पहुंच रहे हैं।


कानपुर देहात-यूपी के उन्नाव में संत शोभन सरकार ने राजा राम बख्श सिंह के किले के एक हजार टन सोने का खजाना होने का दावा किया था बाबा का उन्नाव के आसपास बहुत प्रभाव था. किले के पास शोभन सरकार का आश्रम भी है। जिस संत शोभन सरकार के सपने के आधार पर उन्नाव के ढौंडिया खेड़ा में आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की टीम खजाने की खोज में जुटी थी, उनका बुधवार को निधन हो गया. शोभन सरकार के निधन से भक्तों में शोक की लहर है. कानपुर देहात के शिवली कोतवाली क्षेत्र के बैरी में बने उनके आश्रम में अंतिम दर्शन के लिए भक्त पहुंच रहे हैं।


कौन थे संत शोभन सरकार


सन्त का नाम है परमहंस स्वामी विरक्तानंद उर्फ शोभन सरकार. इनकी उम्र करीब 65 साल मानी जाती है. हैरानी की बात ये है कि किसी आम साधु की तरह इनके माथे पर तिलक नहीं होता. ना चंदन के त्रिपुंड बने होते हैं और तो और बाबा के चेहरे पर दाढ़ी भी नहीं होती. बाबा क्लीन शेव रहते हैं।कपड़े के नाम पर वह सिर पर साफा बांधते हैं. गेरुए रंग की लंगोट पहनते हैं. सिर पर चादर बांधते हैं और बदन पर अंगवस्त्र होता है।


शोभन सरकार हमेशा से इस गांव में नहीं रहे हैं. गांववाले बताते हैं कि शोभन सरकार के आने से से पहले गांव में रघुनंदन दास नाम के साधु रहते थे. अपनी समाधि के वक्त रघुनंदन दास ने कहा कि उनके जाने के बाद गांव में एक चमत्कारी युवा आएगा. फिर 40 साल पहले करीब 16 साल की उम्र में गांव में आए परमहंस स्वामी विरक्तानंद, जिनके चमत्कार देखकर गांववालों ने उन्हे वहां रुकने का अनुरोध किया. आग्रह को वह मान गए. और इन्हें गांव के लोग प्यार से शोभन सरकार कहने लगे।


बताया जाता है कि इनका जन्म कानपुर देहात के शुक्लन पुरवा में हुआ था. पिता का नाम पंडित कैलाशनाथ तिवारी था. कहते हैं कि शोभन सरकार को 11 साल की उम्र में वैराग्य प्राप्त हो गया था. शोभन सरकार ने गांव के लोगों के लिए कई तरह के जनहित के काम किए हैं. यही वजह है कि गांववाले भी उन्हें अब भगवान की तरह मानने लगे हैं. शोभन भगवान राम और हनुमान जी के बहुत बड़े भक्त हैं. बताया जाता है कि उन्होंने राम और हनुमान के कई मंदिरों का निर्माण भी करवाया है.


गौरतलब है कि शोभन सरकार ने दावा किया था कि उन्हें सपने में उन्नाव के राजा राम बक्श सिंह के किले में हजार टन सोने के दबे होने का पता चला है. इसके बाद ही साधु शोभन सरकार ने सरकार से सोना निकलवाने की बात कही थी। स्थिति तब हास्यास्पद हो गई जब सरकार ने उनके इस सपने को सच मानते हुए खजाने को खोजने के लिए खुदाई भी शुरू करवा दी। हालांकि कई दिनों तक चली खुदाई के बाद भी खजाना नहीं मिला। 


खजाने पर शुरू हो गई थी राजनीति


बता दें एक साधु के सपने के आधार पर खजाने की खोज पर केंद्र व प्रदेश सरकार की खूब किरकिरी भी हुई थी. तत्कालीन विहिप के नेता अशोक सिंघल ने कहा था कि सिर्फ एक साधु के सपने के आधार पर खुदाई करना सही नहीं है. वहीं, खजाने के कई दावेदार भी सामने आ गए थे. राजा के वंशज ने भी उन्नाव में डेरा जमा दिया था. वहीँ ग्रामीणों ने भी उस पर दावा किया था. जिसके बाद तत्कालीन केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया था कि खजाने पर सिर्फ देशवासियों का हक़ होगा. उधर तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार ने कहा था कि खजाने से निकली संपत्ति पर राज्‍य सरकार का हक होगा।


गौरतलब है कि यह सोने का खजाना ढौंडिया  खेडा स्टेट के पच्चीसवें शासक राजा राव राम बक्श सिंह के किले के अवशेष में दबा बताया गया था.  जिन्होंने 1857 के दौरान ब्रिटिश शासनकाल के साथ लड़कर  उसके छक्के छुड़ा दिये थे और बाद में उन्हें एक पेड़ से लटका कर फांसी दे दी गयी थी।


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