दुबई में नौकरी का सपना देखना कानपुर के मुईनुद्दीन को पड़ा भारी, पर जो हुआ उसके साथ सुनकर, पैरो तले खिसक गई जमीन

Kanpur :-दुबई में नौकरी का सपना देखना कानपुर के मुईनुद्दीन को भारी पड़ा। ट्रैवल कंपनी संचालकों ने नौकरी के नाम पर न सिर्फ उसके 1.20 लाख रुपये ऐंठ लिए बल्कि दुबई में लावारिस छोड़कर भाग गए। भूख-प्यास से बेहाल मुईनुद्दीन भटकता रहा। खाने के लिए उसे मस्जिद में लाइन में लगकर भीख मांगनी पड़ी। किसी तरह उसने दुबई निवासी कानपुर के युवक से संपर्क कर मदद की गुहार लगाई। युवक ने मुईनुद्दीन का एयर टिकट कराकर उसे कानपुर भिजवाया। भारत लौटते ही मुईनुद्दीन सीधे लखनऊ आया और महानगर कोतवाली में ट्रैवल एजेंसी के निदेशक तशरीफ हसन खान समेत चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कराया।


इंस्पेक्टर अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मुईनुद्दीन कानपुर के जूही सफेद कॉलोनी इलाके में रहता है। कुछ महीने पहले लखनऊ से कानपुर जाते वक्त रोडवेज बस में उसकी मुलाकात गोमतीनगर के उजरियांव निवासी सैय्यद मोहम्मद रहबर उर्फ सुल्तान से हुई थी। सुल्तान ने बताया कि निशातगंज की करामत मार्केट में उसकी एमएचके ट्रैवलिंग सर्विस नाम से एजेंसी है, जिसकी देखरेख उसका भाई तशरीफ हसन खान करता है। उसने बताया कि एजेंसी के जरिये वह खाड़ी देशों में नौकरी दिलवाते हैं। मुईनुद्दीन ने बताया कि सुल्तान ने उससे दोस्ती गांठ ली और कानपुर में घर आकर मां से बातचीत की। उसने मुईनुद्दीन की मां को शारजाह की टिश्यू पैकिंग फैक्ट्री में हेल्पर के पद पर नौकरी के लिए राजी कर लिया। सुल्तान का कहना था कि नौकरी करने पर हर महीने 1700 दरहम मिलेंगे जो भारतीय मुद्रा में करीब 32000 रुपये होते हैं। रहना मुफ्त होगा जबकि खाने के लिए 200 दरहम काटे जाएंगे। मां नौकरी के लिए सहमत हो गईं तो 22 जनवरी 2018 को मुईनुद्दीन निशातगंज स्थित ट्रैवल एजेंसी के ऑफिस पहुंचा और पासपोर्ट व 25 हजार रुपये नकद दे दिए। 26 अप्रैल 2018 को उसे फिर लखनऊ बुलाकर सुल्तान व तशरीफ हसन खान ने 25 हजार रुपये लेकर ऑफर लेटर पर हस्ताक्षर कराए। दो महीने बाद लेबर कार्ड बनवाने के नाम पर उससे 25 हजार रुपये और वीजा के नाम पर 20 अक्तूबर 2018 को 25 हजार रुपये लिए गए। अन्य बहानों से भी ठगों ने रुपया वसूला।


विजिट वीजा थमाने पर बोले- तीन माह बाद मिलेगा इम्प्लॉयमेंट वीजा


पीड़ित मुईनुद्दीन का कहना है कि ठगों ने उसे वर्किंग वीजा के बजाय विजिट वीजा थमाया तो झटका लग गया। उसने अपने रुपये वापस मांगे तो तशरीफ ने टिश्यू पेपर फैक्ट्री का एक एग्रीमेंट देते हुए कहा कि दुबई में उसे भाई शरीफ व इमरान मिलेंगे। दोनों वहीं पर उसका इम्प्लॉयमेंट वीजा बनवा देंगे। तीन महीने बाद उसे अबूधाबी की एक फैक्ट्री में अच्छी नौकरी दिला दी जाएगी। मुईनुद्दीन ठगों के जाल में फंसकर दुबई जाने के लिए तैयार हो गया।
 
दरहम लेकर फैक्ट्री के बाहर छोड़कर भाग गए ठग


मुईनुद्दीन ने बताया कि वह सात दिसंबर 2018 को लखनऊ से शारजाह गया था। वहां उसे तशरीफ के कथित भाई शरीफ और इमरान मिले। वह अपने साथ भारतीय रुपयों को दरहम में बदलकर ले गया था। शरीफ ने उससे 200 दरहम ले लिए और टिश्यू पैकिंग फैक्ट्री ले गए। वहां दोनों बहाना बनाकर गायब हो गए। मुईनुद्दीन ने फैक्ट्री जाकर अपने कागजात और एग्रीमेंट दिखाया तब फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। उसे फैक्ट्री से भगा दिया गया।


एक महीने तक मस्जिद के बाहर भीख मांगकर खाया खाना
मुईनुद्दीन बताते हैं कि ट्रैवल एजेंसी संचालकों की वजह से उन्हें एक महीने तक जलालत की जिंदगी जीनी पड़ी। उन्हें सड़क पर सोना पड़ा। मस्जिद के बाहर लाइन में लगकर खाना खाना पड़ा। इस दौरान वह कानपुर में अपने परिवारीजनों को फोन कर मदद मांगते रहे। परिवारीजनों और परिचितों ने दुबई में ही नौकरी कर रहे कानपुर के उस्मानपुर निवासी मो. रईस से संपर्क करके उसकी मदद की गुहार लगाई। रईस ने मुईनुद्दीन को खाना-कपड़ा देने के साथ ही उसका भारत वापसी का टिकट कराया। कानपुर लौटने के बाद उसने रईस के घर जाकर एयर टिकट के 11704 रुपये लौटाए।


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